Sampradayik Sadbhavna Essay

Sampradayikta par nibandh (Essay on Sampradayikta in Hindi)

प्रस्तावना- सम्प्रदाय का अर्थ है – विशेष रूप से देने योग्य, सामान्य रूप से नहीं अर्थात् हिन्दूमतावलम्बी के घर में जन्म लेने वाले बालक को हिन्दू धर्म की ही शिक्षा मिल सकती है, दूसरे को नहीं। इस प्रकार से साम्प्रदायिकता का अर्थ हुआ एक पन्थ, एक मत, एक धर्म या एक वाद। न केवल हमारा देश ही अपितु विश्व के अनेक देश भी साम्प्रदायिक हैं। अतः वहां भी साम्प्रदायिक हैं। अतः वहाँ भी साम्प्रदायिकता है। इस प्रकार साम्प्रदायिकता का विश्व व्यापी रूप है। इस तरह यह विश्व चर्चित और प्रभावित है।

साम्प्रदायिकता के दुष्परिणाम– साम्प्रदायिकता के अर्थ आज बुरे हो गए हैं। इससे आज चारों और भेदभाव, नफरत और कटुता का जहर फैलता जा रहा है। साम्प्रदायिकता से प्रभावित व्यक्ति, समाज और राष्ट्र एक-दूसरे के प्रति असद्भावों को पहुँचाता है। धर्म और धर्म नीति जब मदान्धता को पुन लेती है। तब वहाँ साम्प्रदायिकता उत्पन्न हो जाती है। उस समय धर्म-धर्म नहीं रह जाता है वह तो काल का रूप धारण करके मानवता को ही समाप्त करने पर तुल जाता है। फिर नैतिकता, शिष्टता, उदारता, सरलता, सहदयता आदि सात्विक और दैवीय गुणों और प्रभावों को कहीं शरण नहीं मिलती है। सत्कर्त्तव्य जैसे निरीह बनकर किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो जाता है। परस्पर सम्बन्ध कितने गलत और कितने नारकीय बन जाते हैं। इसकी कहीं कुछ न सीमा रह जाती है और न कोई अुनमान। बलात्कार, हत्या, अनाचार, दुराचार आदि पाश्विक दुष्प्रवृत्तियाँ हुँकारने लगती हैं। परिणामस्वरूप मानवता का कहीं कोई चिन्ह नहीं रह जाता है।

इतिहास साक्षी है कि साम्प्रदायिकता की भयंकरता के फलस्वरूप ही अनेकानेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्ररीय स्तर पर भीषण रक्तपात हुआ है। अनेक राज्यों और जातियों का पतन हुआ है। अनेक देश साम्प्रदायिकता के कारण ही पराधीनता की बेडि़यों में जकड़े गए हैं। अनेक देशों का विभाजन भी साम्प्रदायिकता के फैलते हुए जहर-पान से ही हुआ है।

साम्प्रदायिकता का वर्तमान स्वरूप– आज केवल भारत में ही नहीं अपितु सारे विश्व में साम्प्रदायिकता का जहरीला साँप फुँफकार रहा है। हर जगह इसी कारण आतंकवाद ने जन्म लिया है। इससे कहीं हिन्दू-मुसलमान में तो कहीं सिक्खों-हिन्दुाओं या अन्य जातियों में दंगे फसाद बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा इसलिए आज विश्व में प्रायः सभी जातियों और धर्मों ने साम्प्रदायिकता का मार्ग अपना लिया है। इसके पीछे कुछ स्वार्थी और विदेशी तत्व शक्तिशाली रूप से काम कर रहे हैं।

उपसंहार– साम्प्रदायिकता मानवता के नाम पर कलंक है। यदि इस पर यथाशीघ्र विजय नहीं पाई गई तो यह किसी को भी समाप्त करने से बाज नहीं आएगा। साम्प्रदायिकता का जहर कभी उतरता नहीं है। अतएव हमें ऐसा प्रयास करना चाहिए कि यह कहीं किसी तरह से फैले ही नहीं। हमें ऐसे भाव पैदा करने चाहिएं जो इसको कुचल सकें। हमें ऐसे भाव पैदा करना चाहिएं-

‘मजहब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना।
हिन्दी है हम वतन है, हिन्दोस्ता हमारा।’

तथा

‘चाहे जो हो धर्म तुम्हारा, चाहे जो भी वादी हो,
नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो तुम अपराधी हो।’

(500 शब्द words Sampradayikta par nibandh)

 

शांति और सदभाव किसी भी देश की बुनियादी आवश्यकता है। देश के नागरिक खुद को तभी सुरक्षित महसूस कर सकते हैं तथा केवल तभी समृद्ध हो सकते हैं जब माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखा जाए। हालांकि भारत में सभी तरह के लोगों के लिए काफी हद तक शांतिपूर्ण माहौल है लेकिन फ़िर भी विभिन्न कारकों के कारण देश की शांति और सदभाव कई बार बाधित हो जाता है।

भारत में विविधता में एकता देखी जाती है। विभिन्न धर्मों, जातियों और पंथों के लोग देश में एक साथ रहते हैं। भारत का संविधान अपने नागरिकों को समानता की स्वतंत्रता देता है और देश में शांति और सरकार द्वारा सदभाव सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कानून लागू किए गए हैं। हालांकि, विभिन्न कारणों से कई उदाहरण सामने आए हैं, जब शांति देश में बाधित हुई है। आपकी परीक्षा में आपकी मदद करने के लिए यहां हमनें इस विषय पर विभिन्न शब्दों की लंबाई के निबंध उपलब्ध करवाए हैं।

शांति और सदभाव पर निबंध (पीस एंड हारमनी एस्से)

Get here some essays on Peace and Harmony in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

शांति और सद्भाव पर निबंध 1 (200 शब्द)

शांति और सदभाव किसी भी देश की मूल आवश्यकता है। एक राष्ट्र तभी शांति और सदभाव हासिल करता है, अगर वह समृद्ध हो सके। हमारे देश के संविधान में नागरिकों के बीच राजनीतिक और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए कानून का प्रावधान है ताकि संघर्ष से बचकर अपने नागरिकों के बीच सदभाव बनाए रख सकें।

हालांकि हमारे देश के लोग एक दूसरे के साथ शांति से रहते हैं लेकिन कुछ राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक कारकों के कारण हमेशा शांति व्यथित होती रही है। मूल्य वृद्धि और बेरोजगारी भी लोगों के बीच अशांति पैदा करती है। अक्सर लोग इन मुद्दों के खिलाफ विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आते है जिसके कारण समाज का सामान्य काम बाधित होता है।

आतंकवाद एक और अन्य कारक है जो लोगों के शांतिपूर्ण जीवन में बाधा डालता है। पिछले कई सालों में हमारे देश पर कई आतंकवादी हमले किए गए हैं जिसके कारण कई लोगों को जिंदगी से हाथ धोना पड़ा है। इन आतंकवादी हमलों में प्रमुख है 1996 में ब्रह्मपुत्र मेल ट्रेन बमबारी, 1998 कोयम्बटूर बम विस्फोट, 2003 में मुंबई बम विस्फोट, 2006 वाराणसी विस्फोट, 2013 बंगलौर विस्फोट और 2015 गुरदासपुर हमला आदि।

1980 के मोरादाबाद, 1984 के सिख विरोधी, 1985 गुजरात और 2013 मुजफ्फरनगर जैसे सांप्रदायिक दंगों ने बड़े पैमाने पर मानव जीवन का विनाश किया है।

देश की सरकार के साथ-साथ देश के नागरिकों को भी शांति और सदभाव कायम करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

शांति और सद्भाव पर निबंध 2 (300 शब्द)

शांति और सद्भाव किसी भी समाज के निर्माण के आधार हैं। अगर देश में शांति और सदभाव होगा तो हर जगह विकास हो सकता है। देश की सरकार देश में शांति और सदभाव सुनिश्चित करने का पुरज़ोर प्रयास करती है लेकिन निहित स्वार्थों के कारण यह अक्सर बाधित होता है। यहां उन सभी कारणों पर एक नज़र डाली गई है और उदाहरण दिया गया है जब देश में शांति भंग हुई थी।

शांति और सदभाव पर प्रभाव डालने वाले कारक:-

  • आतंकवादी हमलें देश में शांति और सदभाव के विघटन के प्रमुख कारणों में से एक रहे है।
  • देश में शांति और सदभाव अक्सर धर्म के नाम पर बाधित होता है। कुछ धार्मिक समूह दूसरे धर्मों को बदनाम करने की कोशिश करते है जिससे समाज में असंतोष पैदा हो जाता है।
  • राजनीतिक दल अक्सर अपने स्वयं के स्वार्थ को पूरा करने के लिए अन्य दलों के खिलाफ लोगों को भड़काते है जिससे राज्य में शांति बाधित होती है।
  • आरक्षण प्रणाली ने सामान्य श्रेणी के लोगों के बीच बहुत अधिक अशांति पैदा की है। कुछ समुदायों ने अपने लोगों के लिए भी आरक्षण की मांग करते हुए समय समय पर विरोध प्रदर्शन किया है।

इसी तरह मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और अंतर-राज्य के मुद्दों ने भी समय-समय पर समाज में अशांति पैदा की है।

शांति और सदभाव के भंग होने के उदाहरण

कई उदाहरण हैं जब देश की शांति और सदभाव बिगड़ गया था। इनमें से कुछ निम्नानुसार हैं:

  • 1957 में रामनाद दंगे
  • 1967 रांची-हटिया दंगे
  • 1987 में हरियाणा में हत्याएं
  • 1990 के हैदराबाद दंगे
  • 1993 बॉम्बे बम विस्फोट
  • लाल किले पर 2000 में आतंकवादी हमले
  • 2001 भारतीय संसद पर हमला
  • 2002 गुजरात दंगे
  • 2006 वड़ोदरा दंगे
  • 2007 दिल्ली बम विस्फोट
  • 2008 जयपुर बम धमाके
  • 2008 गुज्जर आंदोलन
  • 2012 पुणे बम विस्फोट
  • 2013 मुजफ्फरनगर दंगे
  • 2013 बोधगया बम विस्फोट
  • 2016 जाट आरक्षण आंदोलन

निष्कर्ष

देश में शांति और सदभाव बनाए रखना मुश्किल है, जब तक हम में से हर एक अपनी आवश्यकता के बारे में संवेदनशील नहीं हो जाता है और इसके लिए योगदान नहीं देता। अकेले सरकार समाज में भाईचारे और मित्रता की भावना को सुनिश्चित नहीं कर सकती है।

शांति और सदभाव पर निबंध 3 (400 शब्द)

किसी भी समाज को सुचारु रूप से कार्य करने के लिए शांति और सदभाव बहुत महत्वपूर्ण है। अपने नागरिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण देने के लिए भारत सरकार देश में शांति बनाए रखने के कदम उठाती है। हालांकि अक्सर शांति और सदभाव विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारकों के कारण बाधित होती है। यहां इन कारकों पर एक नजर डाली गई है और उदाहरण दिए गये हैं जब देश में शांति और सदभाव बाधित हुए है।

शांति और सद्भाव को प्रभावित करने वाले कारक

अपने स्वार्थ को पूरा करने के प्रयास में राजनीतिक दलों ने आम तौर पर लोगों को आपस में भड़काते है जिससे अक्सर देश में अशांति और गड़बड़ी का माहौल बनता है।

आतंकवादी हमलों ने हमेशा ही देश में शांति और सदभाव को बाधित किया है। इस तरह के हमले से लोगों के बीच काफी भय पैदा हो जाता है।

कुछ धार्मिक समूह अन्य धर्म के लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं और उन्हें अपने धर्म का पालन करने या अन्य धर्मों की निंदा करने के लिए मजबूर करते हैं। इससे कई बार सांप्रदायिक हिंसा भी हुई है। इनके अलावा अंतर-राज्य के मुद्दों, आरक्षण प्रणाली, मूल्य वृद्धि, गरीबी और बेरोजगारी ने भी देश में शांति और सदभाव को बाधित किया है।

शांति और सदभाव के भंग होने के उदाहरण

ये सांप्रदायिक दंगे अगस्त 1967 में रांची और उसके आसपास हुए थे। वे लगभग एक सप्ताह तक जारी रहे। इस दौरान 184 लोग मारे गए थे।

भारत के विभाजन के बाद सबसे घातक हिंदू-मुस्लिम दंगे गुजरात के दंगे थे। ये सितंबर-अक्टूबर 1969 के दौरान हुए।

मुंबई में शिवसेना और दलित पैंथर के सदस्यों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर ये दंगे हुए थे। 1974 में दलित पैंथर नेता भागवत जाधव की हत्या हुई थी।

अगस्त 1980 के दौरान हुए ये दंगे आंशिक रूप से हिंदू-मुस्लिम और आंशिक रूप से मुस्लिम-पुलिस के बीच का संघर्ष था। दंगों की शुरुआत तब हुई जब मुसलमानों ने पुलिस पर पत्थर फेंके क्योंकि पुलिस ने स्थानीय इदगाह से सुअर निकालने से इंकार कर दिया था। नवंबर 1980 तक हिंसक यह घटनाएं जारी रही।

12 मार्च 1993 को बॉम्बे में 12 बम विस्फोट की एक श्रृंखला हुई थी। भारत में सबसे विनाशकारी बम विस्फोटों में से एक बॉम्बे बम ब्लास्ट को 1992 की बाबरी मस्जिद विध्वंस की प्रतिक्रिया में अंजाम दिया गया था।

यह बम विस्फोट गोवा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के राज्यों में सीरियल बम ब्लास्ट थे। ये बम विस्फोट वर्ष 2000 में इस्लामवादी चरमपंथी समूह देन्द्र अंजुमन ने किया था।

निष्कर्ष

भारत के हर नागरिक के लिए देश में शांति और सदभाव के महत्व को समझना आवश्यक है। हम सभी को शांति बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।


 

शांति और सदभाव पर निबंध 4 (500 शब्द)

भारत अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था और धर्मनिरपेक्षता के लिए जाना जाता है जो देश में शांति और सद्भाव सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी नागरिकों को राजनीतिक और धार्मिक समानता देती है। हालांकि कई ऐसे कारक हैं जो देश में शांति को भंग करते हैं। यहां हमने बताया है कि कैसे संविधान विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के एक साथ बांधे रखता है और देश की शांति और सदभाव को बाधित करने वाले कौन से कारण हैं।

धर्मनिरपेक्षता शांति और सदभाव को बढ़ावा देती है

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। भारत का संविधान अपने प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। देश में कोई आधिकारिक धर्म नहीं है। सभी धर्मों का समान रूप से आदर किया जाता है। सभी धर्मों का सम्मान देश में शांति और सदभाव को बढ़ावा देने का एक तरीका है। विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के साथ को पसंद करते हैं और सभी उत्सवों को समान उत्साह के साथ मनाते हैं। स्कूलों में, काम के स्थानों और विभिन्न अन्य स्थानों पर लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं।

निम्नलिखित कारक शांति और सदभाव पर प्रभाव डालते हैं-

भारत के नागरिक बड़े पैमाने पर एक दूसरे के साथ सदभाव में रहते हैं। हालांकि ऐसा कई बार देखा गया है जब विभिन्न कारणों से शांति बाधित होती है। इनमें से कुछ कारण नीचे वर्णित हैं:

आतंकवादी हमलों ने समाज में आतंक पैदा कर दिया है। इन हमलों के माध्यम से आतंक फैल रहा है जिससे देश में शांति और सामंजस्य को प्रभावित करने वाले दिन आ गए हैं। भारत में आतंकवादी हमलों के कई उदाहरण हैं।

हालांकि भारत में कोई आधिकारिक धर्म नहीं है और इसके नागरिकों को अपनी इच्छा के अनुसार अपने धर्म को चुनने या बदलने की आजादी है लेकिन कुछ ऐसे धार्मिक समूह हैं जो उनके धर्म का प्रचार करते हैं और उनके स्तर को बढ़ावा देते हैं ताकि वे दूसरे लोगों के धर्म को अपमानित करें। इससे अक्सर सांप्रदायिक हिंसा होने का डर रहता है।

अक्सर राजनीतिक दलों में सिद्धांतों की कमी देखी जाती है। एक पार्टी सत्ता में आने के प्रयास में दूसरे को बदनाम करने की कोशिश करती है। राज्य में अनावश्यक अशांति पैदा करने वाले लोग एक विशेष धर्म से जुड़े हुए हैं।

निम्न वर्गों के लोगों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करने के प्रयास में, संविधान ने आरक्षण प्रणाली शुरू की इस प्रणाली का काफी हद तक विरोध किया गया और अन्य जातियों से संबंधित बहुत से लोग भी अपने समुदाय के लिए आरक्षण मांगने के लिए आगे आए। इसके कारण कई बार अशांति और बाधा उत्पन्न हुई है।

शिवसेना जैसे राजनीतिक दलों ने महाराष्ट्र में अन्य राज्यों के लोगों को महाराष्ट्र में काम करने की अनुमति देने के प्रति असहिष्णुता दिखाई है। राज्यों के बीच इस तरह के मुद्दे भी शांति के विघटन को जन्म देते हैं।

वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी, विशेष रूप से जो दैनिक उपयोग के लिए आवश्यक हैं, समाज में अशांति का एक और कारण है। अक्सर लोग कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के विरोध में सड़कों पर उतर आते हैं और समाज का सामान्य कामकाज अक्सर इस वजह से बाधित होता है।

निष्कर्ष

जहां तक ​​भारत सरकार की बात है वह देश में शांति और सदभाव को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करती है लेकिन हमें अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है। यह तब होगा जब प्रत्येक नागरिक समाज के खतरों को पहचान देश में पूर्ण शांति और सामंजस्य के लिए अपना योगदान देगा।


 

शांति और सदभाव पर निबंध 5 (600 शब्द)

विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग भारत के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। हालांकि ये लोग बड़े पैमाने पर एक-दूसरे के साथ सदभाव में रहते हैं लेकिन कई कारणों के चलते अक्सर देश की शांति और सामंजस्य बाधित हो जाती है। यहां नीचे बताया गया है कि विविधता के बीच सदभाव कैसे बनाए रखा जाता है और कौन से कारण शांति को प्रभावित करते हैं

शांति और सदभाव को प्रभावित करने वाले कारक

जहां ​​भारत सरकार देश में शांति और सदभाव को बनाए रखने के हर संभव कदम उठा रही है वहीं कई कारक हैं जो इसे प्रभावित करते हैं। यहां उन पर एक विस्तृत नज़र डाली गई है:

भारत का संविधान किसी भी धर्म का आधिकारिक तौर पर पालन नहीं करता है और अपने नागरिकों को किसी भी समय अपने धर्म को चुनने या बदलने की इजाजत देता है। हालांकि यहाँ कुछ ऐसे धार्मिक समूह हैं जो अपने धर्म को उस सीमा तक फैलातें हैं जो देश की शांति और सदभाव में अस्थिरता लाता है।

भारत में व्यक्ति की जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव करना आम बात है हालांकि संविधान सभी को समानता का अधिकार देता है। यह भेदभाव कभी-कभी सामाजिक संतुलन को बिगाड़ता है जिससे शांति बाधित होती है।

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों के जीवन स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से देश में आरक्षण प्रणाली शुरू की गई थी लेकिन अन्य जातियों जैसे कि गुज्जर और जाट बिरादरी के लोगों ने भी आरक्षण की मांग शुरू कर दी है जिससे शांति व्यवस्था बिगड़ गई है।

कई क्षेत्रीय पार्टियां अन्य राज्यों के लोगों को अपने इलाके में बसने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते हैं। यह अक्सर शिव सेना के सदस्यों और महाराष्ट्र के अन्य राज्यों के लोगों के बीच बहुत तनाव पैदा करता है।

शिक्षा का अभाव और अच्छे रोजगार के अवसरों की कमी से बेरोजगारी हो जाती है, जो अंततः गरीबी में वृद्धि करती है और देश में अपराध की दर को बढ़ाती है।

कई बार विपक्ष जनता को अपने स्वयं के स्वार्थी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सत्ता में मौजूद पार्टी के खिलाफ उकसाता है जो अंततः अशांति और गड़बड़ी के मुख्य कारक है।

मूल्य वृद्धि एक और समस्या है जो एक समाज के सुचारु संचालन को बाधित कर सकती है। कई उदाहरण सामने आए हैं जब लोग अनुचित कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ विद्रोह करने के लिए आगे आए हैं जिससे शांति बाधित हो चुकी है।

भारत ने कई बार आतंकवादी हमलों का सामना किया है जो नागरिकों के बीच डर पैदा कर चुके हैं। इस तरह के हमलों के कारण बनी परेशानी समाज के सामान्य कामकाज को बाधित करती है।

शांति और सदभाव के विघटन के उदाहरण

कई उदाहरण हैं जब देश की शांति और सदभाव को विभिन्न समूहों और समुदायों के साथ समझौता किया गया था। कुछ ऐसे ही उदाहरणों को नीचे साझा किया गया है:

1969 के गुजरात दंगे: भारत के गुजरात राज्य ने सितंबर-अक्टूबर 1969 के बीच हिंदू और मुस्लिमों के बीच सांप्रदायिक हिंसा देखी। यह राज्य में पहली बड़ा दंगा था जिसमें बड़े पैमाने पर नरसंहार और लूट शामिल थी।

1984 के सिख दंगे: हिंसक भीड़ ने देश में सिक्खों पर हमला किया। यह सिख अंगरक्षकों द्वारा पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के जवाब के रूप में किया गया था।

2008 का मुंबई : इस्लामी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कुछ सदस्यों ने मुंबई में प्रवेश किया और चार दिनों के तक गोलीबारी और बम धमाकों की बौछार की।

जाट आरक्षण आंदोलन: फरवरी 2016 में हरियाणा में जाट लोगों द्वारा कई विरोध प्रदर्शन किए गए। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में अपनी जाति को शामिल करने की मांग की। इसने राज्य के सामान्य कार्य को बाधित किया और आज भी आंदोलन पूर्ण रूप से खत्म नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

हालांकि भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, ताकि उनके बीच पूर्ण सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके लेकिन कई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों के कारण शांति भंग हो गई है। अकेले सरकार देश में शांति और सदभाव बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार नहीं हो सकती। हम में से हर एक को यह चाहिए कि हम अपनी नागरिकता के साथ भाईचारे की भावनाओं का पोषण करने की जिम्मेदारी भी लें।


Previous Story

दिव्यांग/विकलांग लोगों के लिए बिज़नेस आईडिया

Next Story

मानव अधिकारों पर निबंध

Categories: 1

0 Replies to “Sampradayik Sadbhavna Essay”

Leave a comment

L'indirizzo email non verrà pubblicato. I campi obbligatori sono contrassegnati *